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कहर

Posted On: 4 Feb, 2016 में

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आतंकियों ने जो कहर बरसाया है
उस कहर को हम न सहेंगे
कसम है इस मिटटी की
हमारी जान है जिसमे बसती
जड़ से उखड करभगा देंगे तुम्हें
दिखा देंगे तुम्हें तुम्हारी औकात
ये भारत भूमि है
यहाँ न चलेगी तुम्हारी चाल
देश भक्ति मिली है हमारी नस नस में
खून की नदियां हम बहा देंगे
अगर न ख़त्म किया यह आतंक
जड़ से उखाड़ कर भगा देंगे तुम्हें
जला के ख़ाक में मिला देंगे तुम्हें
हम सभी जुडे हैं एक कड़ी से
हम सभी बंधे हैं एक लड़ी से
तोड़ने की तो बात दूर है
आँख उठाकर भी देखा तो
मिटटी में मिला देंगे तुम्हें
अहिंसा परम धर्म है हमारा लेकिन
अपनी पर आ गए तो
तोड़ देंगे हम सारी हदें
जड़ से उखाड़ कर भगा देंगे तुम्हें
जला के ख़ाक में मिला देंगे तुम्हें

कवयित्री – मीता गोयल

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
February 5, 2016

बहुत खूब मीता जी /

meetagoel के द्वारा
February 5, 2016

thank you

sadguruji के द्वारा
February 6, 2016

आदरणीया मीता गोयल जी ! देशभक्ति से ओतप्रोत अच्छी रचना ! इस अनुपम मंच पर स्वागत है ! अच्छे लेखन हेतु शुभकामनाएं !

meetagoel के द्वारा
February 13, 2016

मेरा हौसला बढ़ने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद मीता गोयल


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