SAITUNIK

HINDI POEMS & Blogs

52 Posts

53 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 23463 postid : 1318818

अवध की छोरी खेले है होली

Posted On: 12 Mar, 2017 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

अवध की छोरी खेले है होली
हाए उसे देख तो बलमा की नीयत है डोली
पहन चली वो तो रंग बिरंगी घाघरा और चोली
यौवन की चंचलता उसने तो हवाओं में घोली
अंगना में भागती फिरती है ये चकोरी
हँसी के फव्वारों से फिज़ा है इसने धोली
ये है अवध की छोरी जो खेले है होली
गालों के गुलाल जैसी है ये कली
आँखों के काजल जैसी है ये सुंदरी
पिचकारी की फुहार जैसी है ये ठंडी
भांग की तासीर जैसी है ये नशीली
खेले है अपने पिया संग होली
भागती फिरे है ये हिरनी जैसी
रंगीन दुपट्टे को हवा में फैलाए
नाचती है जैसे जंगल की मोरनी
ये है अवध की छोरी
जो खेले है होली
हाए उसे देख तो बलमा की नीयत है डोली
हाए उसे देख तो बलमा की नीयत है डोली
www.meetagoel.in

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

0 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



latest from jagran