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meetagoel


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कारवां है सपनों का…

Posted On: 14 Sep, 2017  
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वाह भई वाह ….

Posted On: 7 Sep, 2017  
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बंद करो ..

Posted On: 28 Aug, 2017  
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एक दफा तो कहो

Posted On: 28 Apr, 2017  
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गली का वह नुक्कड़

Posted On: 25 Mar, 2017  
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अवध की छोरी खेले है होली

Posted On: 12 Mar, 2017  
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जी ले ए दिल

Posted On: 7 Mar, 2017  
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प्यारे मित्रों अपने इस देश को समझो

Posted On: 14 Jan, 2017  
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सिंदूरी लाल

Posted On: 6 Jan, 2017  
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जी लो अभी ..

Posted On: 20 Dec, 2016  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा: meetagoel meetagoel

के द्वारा: abodhbaalak abodhbaalak

के द्वारा: harirawat harirawat

के द्वारा: meetagoel meetagoel

बिलकुल सही लिखा आपने एक बच्चे की ब्यथा को ब्यक्त करती मेरी लिखी एक ग़ज़ल पर गौर फरमाये सुबह सुबह अफ़रा तफ़री में फ़ास्ट फ़ूड दे देती माँ तुम टीचर क्या क्या देती ताने , मम्मी तुमको क्या मालूम क्या क्या रूप बना कर आती ,मम्मी तुम जब लेने आती लोग कैसे किस्से लगे सुनाने , मम्मी तुमको क्या मालूम रोज पापा जाते पैसा पाने , मम्मी तुम घर लगी सजाने पूरी कोशिश से पढ़ते हम , मम्मी तुमको क्या मालूम घर मंदिर है ,मालूम तुमको पापा को भी मालूम है जब झगड़े में क्या बच्चे पाएं , मम्मी तुमको क्या मालूम क्यों इतना प्यार जताती हो , मुझको कमजोर बनाती हो दूनियाँ बहुत ही जालिम है , मम्मी तुमको क्या मालूम ग़ज़ल ( मम्मी तुमको क्या मालूम ) मदन मोहन सक्सेना

के द्वारा: Madan Mohan saxena Madan Mohan saxena

के द्वारा: Riyaz Abbas Abidi Riyaz Abbas Abidi

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